MENTAL ILLNESS AND MENTAL HEALTH

 

Hello friend, मैं हूँ सत्येन्द्र और स्वागत है आपका Scientech biology में। दोस्तों Human Body की सारी कार्यप्रणाली उसके brain पर ही निर्भर करती है। हर एक छोटे-से छोटा काम हो या चाहे फिर कोई बड़ा काम, सारे decision दिमाग के जरिए ही होते हैं।

कभी-कभी brain की कार्य क्षमता बुरी तरह से प्रभावित हो जाती है और लोगों को किसी न किसी प्रकार की मानसिक बीमारी का सामना करना पड़ता है।

इस दौरान लोगों के कार्य करने की क्षमता के साथ-साथ उनके behavior और उनकी क्वालिटी ऑफ लाइफ भी बुरी तरह affected हो जाती है।

Mental Health में हमारे emotional, psychological, और social well-being शामिल हैं। यह प्रभावित करता है कि हम कैसे सोचते हैं, क्या महसूस करते हैं और कैसे कार्य करते हैं। आपका mental health उम्र बढ़ने के साथ बदलता चला जाता है। 

Mental Health से एक व्यक्ति को अपनी ability का पता चलता है, उसके भीतर self-confidence आता कि वे जीवन में तनाव से सामना कर सकता है और अपने work या action से अपने community के विकास में योगदान दे सकता है।

Mental disorder व्यक्ति के Health related behavior, judgements, Regular exercise, पर्याप्त नींद, आदि को प्रभावित करता है और शारीरिक रोगों के खतरे को बढ़ाता है।

Mental illness के कारण ही व्यक्ति को unemployment, बिखरे हुए परिवार, गरीबी, नशीले पदार्थों का सेवन और संबंधित अपराध का सहभागी बनना पड़ता है।

अगर किसी व्यक्ति का Mental Health सही रहेगा तो उसका जीवन भी सही रहेगा। इसलिए हम आपको अपने इस video में Mental disorder से जुड़ें हर पहलू के बारे में विस्तार से बताएंगे, जो आपके Mental Health को बेहतर बनाने में मदद करेगा। पर आइए सबसे पहले जान लेते हैं, Mental illness क्या होता है।

दोस्तों Mental illness एक ऐसी बीमारी होती है जो किसी भी व्यक्ति की Thought, Feelings, Mood, behaviors आदि में बदलाव ला देता है। डिप्रेशन, तनाव, बिपोलर डिसऑर्डर भी इसी मानसिक बीमारी का एक हिस्सा है।

ऐसी situation अगर लगातार कुछ समय तक बनी रहती है तो वह किसी इंसान की daily routine को Negative रूप से बदलने लगती है।

मेंटल हेल्थ हमारे पूरे स्वास्थ्य पर positive और negative दोनों परिणाम दिखाती है। बशर्ते यह बात इस पर निर्भर करती है कि हमारी मेंटल हेल्थ कितना ठीक तरह से काम करती है और कितनी ठीक तरह से नहीं। उदाहरण के लिए देखा जाए तो मेंटल हेल्थ से जुड़ी कुछ समस्याएं जैसे डिप्रेशन के कारण हमें कई प्रकार की फिजिकल हेल्थ प्रॉब्लम हो सकती है। इसके अलावा अगर यह लंबे समय तक बना रहे तो स्ट्रोक, टाइप टू डायबिटीज और Heart disease का खतरा भी बढ़ जाता है।

अपने जीवन के दौरान, अगर आप Mental Health problems का अनुभव करते हैं तो इसके बारें में जानना, डॉक्टर की मदद लेना और इलाज करवाना बेहद जरूरी है क्योंकि ये आपकी thought, mood और behaviors को affect कर सकते हैं। ऐसे कई अन्य कारण भी हैं, जो कि Mental Health problems में contribute करते हैं, जिनमें Biological factors, जैसे कि जीन या brain में present chemicals, mental health का family history, life experiences, depressive environment, childhood trauma, stressful event of life, negative thought, unhealthy lifestyle, abusing drugs and alcohol, और  treatment with some chronic disease etc. शामिल है।

Symptoms ऑफ mental health:

दोस्तों प्रत्येक Mental disease के अपने-अपने symptoms होते हैं। हालांकि, कुछ common warning sign या symptoms हैं जो आपको alert कर सकते हैं कि आपको किसी को professional मदद की आवश्यकता है। जैसे कि 

  • -ज्यादा सोचना (Over thinking)
  • -एंग्जायटी और घबराहट (Anxiety)
  • personality change
  • --खाने या सोने के पैटर्न में बदलाव
  • Problems और daily activities को करने में असमर्थता
  • -ज्यादा चिंता करना (excessive anxieties)
  • -लंबे समय तक depression और उदासीनता (apathy)
  • - ज्यादा गुस्सा करना या violent behavior
  • -suicide के बारे में सोचना या खुद को नुकसान पहुंचाना और
  • -बहुत ज्यादा मूड स्विंग्स होना

इन सब के अलावा भी कई और symptoms होते हैं जो अलग अलग mental disorder में देखने को मिलता है।

दोस्तों आइए अब कुछ मेंटल illness को डीटेल में जानते हैं।

एंग्जायटी डिसऑर्डर (Anxiety Disorders)

दोस्तों एंग्जायटी डिसऑर्डर (Anxiety Disorders) Mental disease का सबसे common Type है। इन स्थितियों वाले लोगों में गंभीर भय या चिंता होती है, जो certain objects या situations से संबंधित होती है। यह चल रही चिंता और तनाव शारीरिक लक्षणों के साथ हो सकता है, जैसे कि बेचैनी, किनारे पर महसूस करना या आसानी से थकावट, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, Muscles में तनाव या sleeping problems etc.

दोस्तों Anxiety disorder भी कई टाइप के होते हैं जैसे की –

a. सामान्यीकृत चिंता विकार (Generalized anxiety disorder)

इस तरह के anxiety disorder में लगातार और अत्यधिक चिंता शामिल होती है जो आपके daily activities को affect करती है। यह चल रही चिंता और तनाव शारीरिक लक्षणों के साथ हो सकता है, जैसे कि बेचैनी, आसानी से थकावट, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई।  anxiety disorder का दूसरा type है Panic Disorder-

इस तरह के anxiety disorder बार-बार होने वाले पैनिक अटैक, physical  और psychological distress  का एक जबरदस्त combination है। इसके कई लक्षण हो सकते हैं जैसे कि Heart beat का बढ़ जाना, पसीना आना, सांस की तकलीफ महसूस करना, dizziness का होना इत्यादि।

इसमे तीसरा टाइप है phobia का होना , फोबिया एक specific object , situation या गतिविधि का अत्यधिक और लगातार fear  है जो आमतौर पर हानिकारक नहीं होता है। anxiety disorder में एक और type Social Anxiety Disorder होता है जिसमें व्यक्ति को शर्मिंदगी, अपमानित, अस्वीकार किए जाने या सामाजिक संबंधों में कमी देखने के बारे में ज्यादा चिंता और असुविधा होती है। इस तरह के illness  वाले लोग स्थिति से बचने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर जानेंबोलने, नए लोगों से मिलने और सार्वजनिक रूप से खाने पीने से अत्यधिक डरते हैं। 

दोस्तों next mental Illness का नाम है Mood disorders

मूड डिसऑर्डर वाले लोगों के mood में बहुत जल्दी बदलाव आता रहता है। इसके भी कई प्रकार होते हैं, जैसे कि Major depression

इस disorder  के साथ एक व्यक्ति लगातार लो फिल करता है और उसका मूड हमेशा खराब रहता है और उन activities और events में रुचि खो देता है जो पहले से आनंद लेते थे। वे लंबे समय तक निराश या अत्यधिक उदास महसूस करता है।

b. बाइपोलर डिसऑर्डर (Bipolar disorder)

बाइपोलर डिसऑर्डर  मूड disorder का दूसरा टाइप है  जिसमें व्यक्ति अपने mood , energy level , activity level और दैनिक जीवन को जारी रखने की क्षमता में unusual changes  का अनुभव करता है। अच्छा महसूस करने पर वो बहुत ज्यादा एनर्जेटिक हो जाते हैं, जबकि लो मूड होने पर depression  में चले जाते हैं। 

दोस्तों अगला mental disorder है सिजोफ्रेनिया

सिजोफ्रेनिया एक या कई mental illness का एक समूह है जिसे समझना काफी मुश्किल है।  सिजोफ्रेनिया के लक्षण आमतौर पर 16 से 30 साल की उम्र के बीच विकसित होते हैं। ऐसे व्यक्ति के विचार कई बार टूटे हुए और खोए हुए से होते हैं। ये लोग उन चीजों को भी अपने आस पास महसूस करते हैं, जो कि सच में दुनिया में है ही नहीं।  सिजोफ्रेनिया के नकारात्मक और सकारात्मक लक्षण हैं। सकारात्मक लक्षणों में भ्रम यानि की delusion , thought disorder  और hallucinations शामिल हैं। नकारात्मक लक्षणों में lack ऑफ motivation और खराब mood शामिल हैं।

दोस्तों मेंटल हेल्थ से जुड़ी हुई किसी भी प्रकार की समस्या से बचे रहने के लिए सबसे पहले आपको अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि आप किसी भी प्रकार की बीमारी से सुरक्षित रहें। किसी भी बीमारी से suffer होने के कारण लगातार आप उस बारे में भी सोचते रह सकते हैं और आप के दिमाग पर नेगटिव अफेक्ट ही हावी रहेगा जिसका असर मेंटल हेल्थ पर होगा।

दोस्तों मेंटल हेल्थ से जुड़ी हुई किसी भी प्रकार की समस्या से बचे रहने के लिए आपको ब्रेन बूस्टर फूड्स का सेवन करना चाहिए। इन फूड्स में नट्स, डार्क चॉकलेट, पंपकिन सीड्स, ब्रोकली, हल्दी, ब्लूबेरी, फैटी फिश जैसे खाद्य पदार्थ शामिल हैं। इनका आप नियमित रूप से सेवन कर सकते हैं जो आपकी मेंटल हेल्थ को दुरुस्त रखने में काफी मदद करेंगे।

दोस्तों आइए मेंटल health को बेहतर बनाने के लिए कुछ tips को जान लेते हैं।

मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उपाय- Tips for good mental health

दोस्तों हमेशा -दूसरों से जुड़े रहें और अपने आप को अलग न समझें। हमेशा पॉजिटिव सोचें शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। दूसरों की मदद करते रहें।पर्याप्त नींद लें ,हेल्दी डाइट लें खास कर मूड को बेहतर बनाने वाली चीजों को खाएं। इसके अलावा शराब, smoking और ड्रग्स से बचें। तनाव ज्यादा न लें।बहुत ज्यादा सोचना बंद करें।एक्सरसाइज और योग करें। हमेशा ऐसा कुछ करें जिससे आपका मन लगा रहे और आप खुश रहें। 

PLACENTA PREVIA

दोस्तों placenta एक ऐसा organ है जो pregnancy के दौरान आपके यूटरस के lining के अंदर बढ़ता है। यह umbilical cord यानि गर्भनाल से जुड़ा होता है, और आपके यूटरस मे पल रहे बच्चे को oxygen, और nutrients की supply करता है। यह waste products को भी आपके बच्चे से दूर करता है। 

दोस्तों sperm और egg के fertilization के बाद fertilized egg फेलोपियन ट्यूब से होते हुए uterus में implant होता है। इस process के दौरान normal cases में egg खुद को uterus में सबसे ऊपर की ओर attach करता है। लेकिन कई बार fertilized egg गर्भाशय यानि uterus के निचले हिस्से से ही खुद को जोड़ लेता है. Simple word में कहें तो इस तरह के मामलो में umbilical cord या प्लेसेंटा जो बच्चे के विकास में अहम रोल निभाता है, ठीक यूटरस के मुंह पर स्थित हो जाता है जो कई तरह से खतरनाक साबित हो सकता है.

जैसे ही आपका uterus लेबर के दौरान open होता है यह placenta को यूटरस से जोड़ने वाली ब्लड vessels के फटने का कारण बन सकता है। इससे भारी bleeding हो सकती है। इस हालत मे लगभग सभी वुमन के लिए c सेक्शन यानि seizures की अवस्यकता हो सकती है।

दोस्तों यदि pregnancy के सुरुवात मे ही placenta Previa है, तो आमतौर पर इससे आपको कोई problems नहीं होती है। हालांकि pregnancy के अंतिम भाग या 3 rd. Trimester मे ये problems severe bleeding और other complications का कारण बन सकती है।

दोस्तों मुख्य रूप से placenta Previa 3 types के होते हैं।

Complete placenta Previa: Complete placenta Previa की स्तिथि तब होती है जब placenta uterus से लेकर cervix तक के पूरे रास्ते को पूरी तरह से cover कर लेता है।

Partial Placenta Previa: Partial Placenta Previa के स्तिथि मे यूटरस के gate यानि cervix का कुछ हिस्सा ही placenta द्वारा cover किया जाता है।

Marginal Placenta Previa: Marginal Placenta Previa वह सिचूऐशन है जिसमे placenta cervix के पास situated होता है लेकिन cervix को कवर नहीं करता है।

दोस्तों लो लेवल placenta या लो placenta सब्द का use placenta Previa और marginal placenta Previa दोनों स्तिथि को बताने के लिए किया जाता है।

Diagnosis  

दोस्तों अल्ट्रासाउंड स्कैन के जरिये डॉक्टर को आपकी प्लेसेंटा की स्थिति का पता चलता है। यदि आप pregnancy की शुरुआत में अल्ट्रासाउंड स्कैन कराएं और इसमें प्लेसेंटा cervix के पास दिखाइ दे, तो भी चिंता न करें। baby के बढ़ने के साथ आपका बढ़ता uterus शायद placenta को ऊपर की तरफ खींच लेगा और यह cervix से दूर हो जाएगी। इसे प्लेसेंटल माइग्रेशन कहा जाता है। ऐसा उन अधिकांश मामलों में हो जाता है जहां placenta pregnancy की शुरुआत में नीचे की तरफ स्थित होती है।

लेकिन यदि pregnancy के 20वें week मे या इसके बाद के वीक मे किसी pregnant lady को bleeding हो रहा है तो placenta Previa की आसंका हो सकती है। placenta Previa की screening के लिए आमतौर पर ultrasound technique का use किया जाता है। इससे placenta की मौजूदा situation की exact जानकारी मिल जाती है और doctor को इससे पता चल जाता है की placenta uterus के cervix के रास्ते को कितना cover कर रहा है। लेकिन कुछ मामलों में placenta  uterus  से पिछली तरफ भी होता है। ऐसे में जांच के लिए ट्रांसवेजिनल अल्ट्रासाउंड (टीवीएस)  का help लिया जाता है। इसमें vagina के अंदर ट्रांसड्यूसर inserts करके पता लगाया जाता है कि placenta किस जगह है।

 

दोस्तों आइए अब ये जानते हैं की placenta Previa किन वुमन मे कॉमन है।

दोस्तों placenta Previa के होने के पीछे का exact cause क्या है यह अब तक ज्ञात नहीं है लेकिन कुछ मामलों मे यह कॉमन होता है जैसे-

अगर पहली डिलीवरी सिजेरियन हुई हो।

पहले अगर abortion हुआ हो।

Uterus का abnormal तरीके से ग्रोथ होना।

पिछले pregnancy मे भी यदि placenta Previa की problem रही हो

Smoking alcohol tobacco का सेवन करने की आदत हो।

या फिर uterus related कोई inborn problems हो

 

 

 

 

Effect of placenta previa:

दोस्तों प्लेसेंटा प्रिविया का main effect यह है कि आपकी डिलीवरी सीजेरियन ऑपरेशन से होगी। मगर, और भी कुछ complexion हैं, जिनके बारे में आपको पता होना चाहिए। जैसे की अगर, आपको प्लेसेंटा प्रिविया है, तो pregnancy या डेलीवेरी के दौरान अचानक बिना दर्द के bleeding  होने का खतरा रहता है।

इसके अलावा एक और rare complication हो सकता है जिसमे placenta खुद को uterus की दीवार में काफी गहराई तक implant कर लेती है,और baby के जन्म के बाद बाहर निकलने की बजाय यह यूटरस से जुड़ी रहती है। इस condition को placenta ऐक्रिटा कहते हैं। अगर आपका पहले सीजेरियन ऑपरेशन हो चुका है, तो ऐसा होने की संभावना अधिक रहती है। और आपके जितने ज्यादा सीजेरियन होते हैं, यह खतरा उतना ही ज्यादा बढ़ जाता है।

सामान्यत: जैसे-जैसे pregnancy आगे बढ़ती है, प्लेसेंटा प्रिविया की समस्या अपने आप ही दूर हो जाती है। ऐसा यूटरस का आकार बढ़ने के कारण होता है। वहीं, अगर 2 nd trimester में लो-लाइंग प्लेसेंटा का पता चल जाए, तो 3 rd trimester के मध्य तक डॉक्टर lady की condition के अनुसार कुछ suggestion  दे सकते हैं। fetus और mother का health और यूटरस में fetus  का location और position , इन सब factors पर depend  करता है कि normal डेलीवेरी होगा या सीसेक्शन डिलीवरी होगी। यदि pregnancy के बाद के steps में प्लेसेंटा प्रीविया की स्थिति विकसित हो जाती है तो सीसेक्शन डिलीवरी की संभावना बढ़ जाती है।

दोस्तों placenta previa मे blood के deficiency को रोकने के लिए sufficient amount मे nutritious फूड्स लें, especially आयरन से भरपूर diet जैसे कि red meat, दाल और हरी पत्तेदार सब्जियां। यह आप में खून की कमी होने की संभावना हो कम करेगा। इसके अलावा आपको नियमित तौर पर आपके डॉक्टर द्वारा prescribed किए गए iron supplements को भी लेना चाहिए।

दोस्तों उम्मीद करता हूँ की इस video मे दी गई सारी जानकारी आपको समझ मे आ गई होगी , दोस्तों आपका एक suggestion हमारे video को और बेहतर बना सकता है। इस विडिओ से related अगर आपकी कोई question हो तो please कमेन्ट करें और चैनल को subscribe करना न भूलें।  

 

Scienec News (April) 2026

  प्रमुख साइंस न्यूज़ हाइलाइट्स (April 2026): अंतरिक्ष और खगोल विज्ञान (Space & Astronomy): नासा का आर्टेमिस II मिशन चंद्रमा के चारों ...